आज जीत की रात
आज मैं क्या कहूँ
बहुत बड़ी है बात आज
मैं आजादी वाली बात लिखूँ
लिखूं गुलामी की जंजीरें
या बंदूकों की आवाज लिखूँ
When world sleeps India will awake वाला
चाचा नेहरू का आगाज़ लिखूँ
मैं लिखूँ आंसुओं वाले पन्ने
या 1857 का संग्राम लिखूँ
मैं झाँसी वाली रानी या
डलहौजी का अत्याचार लिखूँ
मैं भूखे लोगों की लाशों पर
Lytton का दिल्ली दरबार लिखूँ
या भगत सिंह के किस्से को
एक बार नहीं सौ बार लिखूँ
मैं खुदीराम की फांसी या
जालियां वाला कांड लिखूँ
शायद कोई शब्द आँसुओ से बच निकले
अगर एक भी पन्ना मैं शहीदों के नाम लिखूँ
मैं बापू जी का चश्मा धोती
या अहिंसा की तलवार लिखूँ
तुम मुझे खून दो इस आजादी के बदले
नेताजी के शब्दों की ललकार लिखूँ
जब मैं दुविधा में घिर जाता हूँ
खुद को हरा सा पाता हूँ
तो मैं ये बातें खुद से कहता हूँ
खुद ही खुद को समझाता हूँ
सिर्फ वर्षों का जीवन लेकर
हम तो भूखे पेट लड़े
एक तरफ थी गोलियां
पर हम लाठी लेकर खड़े रहे
अब तू रहता है आजाद देश में
मन तू क्यों घबराता है
गाँधी सुभाष का देश तेरा
तू किसका शोक मनाता है
ले थाम तिरंगा हाथों में
"जय हिन्द " का नारा सांसों में
सपनों वाल देश बनेगा तेरा
रख भरोषा मजबूत इरादों में
देख तिरंगे को लहराते
मैं मन ही मन मुस्काता हूँ
मैं क्या दे जाऊँ मातृभूमि
ये के सोच चलता जाता हूँ
ये सोच के चलता जाता हूँ,ये सोच के चलता जाता हूँ..........
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